समाज में सांस्कृतिक मूल्यों का हास”

कोई भी राष्ट्र अपनी सामाजिक एवं सांस्कृतिक उन्नति तभी कर सकता है, जब उस देश के ऋषि, मुनि, शिक्षाविद और महापुरूषों के द्वारा दिये गये मार्गदर्शक सिद्धान्तों को अपने जीवन में आत्मसात् करें। हम ज्यों-ज्यों भौतिकवाद की और बढ़ते गये त्यों-त्यों हमारे देश के सांस्कृतिक मूल्यों का हास होता गया और प्रतिदिन सांस्कृतिक मूल्य बद से बदतर होते गये।

हम आध्यात्मवाद में पले-बढ़े हैं और भौतिकवादी होने का प्रयास करते हैं, इसी दोहरी मानसिकता के कारण सांस्कृतिक मूल्यों का हास होता गया, सांस्कृतिक मूल्यों के हास के लिए, समाज का प्रत्येक व्यक्ति जिम्मेदार है । हमारे देश व समाज में दूसरों को जिम्मेदार ठहराने की प्रवृत्ति है, यह प्रत्येक व्यक्ति की आदत है, और यह आदत उसके अवचेतन मन में इस प्रकार बैठी हुई है कि वह समझने तक की कोशिश नहीं करता कि इन परिस्थितियों के लिए वह भी जिम्मेदार है, जब वह पतित होते चले गये, तो दोष भाग्य पर मढ़ने लगे, और अंध विश्वास की चादर ओढ़कर हम अपने को बचाने में लगे रहें, कुछ लोग भाग्यवाद पर विश्वास करते हैं, इस प्रवृत्ति से भी बचना होगा, क्योंकि भाग्य का निर्माण कार्य पर टिका है, अध्यात्म भाग्यवाद पर कतई नही था, पूरी तरह कर्म पर था । अब हमें भाग्यवादी नहीं, प्रगतिवादी बनना है, तो नई दिशा, नई गति, नई सोंच की आवश्यकता है ।

66 देश, समाज के सांस्कृतिक मूल्यों के ह्रास के लिए यही हमारी भौतिकवादी सोच बहुत हद तक जिम्मेदार है।

‘धन्योऽयं भारतो देशो धन्येयं भारतभूमि: – तदुपासकाः वयं धन्या: अहो धन्यपरम्परा ।।’

(सुरेश सिंह सेंगर )
प्रवक्ता संस्कृत

“An Honest man is the noblest creation of God.” Man is the image of God. He symbolizes his infinite beauty, goodness, grace of body and mind. He is His earthly symbol, his image on earth. He who is honest is the noblest creation of God. Honesty implies sacrifices, transparency of truth, sincerity of heart, the earnestness of purpose, devotion to high ideas and work for the benefit of humanity. An honest man is prepared to wear the crown of thorns and suffers martyrdom for the glory of God and for the establishment of God’s Kingdom on this earth. He is the noblest handiwork of God. Christ was
such a man.
Arvind Singh Yadav
M.A. (Eng. & Geo.) B.Ed.